हानि : सफलता की जननी
🧩हानि : सफलता की जननी
✍️लेखक : विनय तिवारी
हानि जीवन का कटु सत्य है।
जिस व्यक्ति ने कभी कष्ट नहीं उठाया, वह सुख का स्वाद कभी नहीं जान सकता।
जिसे कभी हानि नहीं हुई, वह सच्चे अर्थों में सफल भी नहीं हुआ।
हानि ही मनुष्य को सफलता की राह दिखाती है।
जिसने बड़ी हानि झेली, उसने ही बड़ा लाभ पाया।
जो व्यक्ति जोखिम नहीं उठाता, वह जीवन में ठहराव का प्रतीक बन जाता है।
अगर आप चाहते हैं कि जीवन केवल दाल-रोटी में कट जाए, तो आपके बच्चों का जीवन भी वैसा ही कटेगा।
फिर कौन बनेगा मालिक?
क्या केवल व्यापारी का बेटा ही व्यापारी बनेगा?
क्या केवल नेता का बेटा ही नेता बनेगा?
क्या नौकरीपेशा का बेटा ही नौकरी करेगा?
हम बस देखते रहते हैं, आशा करते हैं —
कि हमारा बच्चा इतना पढ़े कि नौकरी कर सके।
पर सोचिए,
आप उसे पढ़ाकर नौकर बनाना चाहते हैं!
आप बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
उन्हें पूंजी (capital) दीजिए,
सिखाइए कि वे मालिक बनें, नौकर नहीं।
उनके मन में गुलामी का संस्कार मत भरिए।
उन्हें पढ़ाइए ताकि वे लायक बनें, संस्कारी बनें,
ना कि केवल आपकी शान या नाम बनकर रह जाएँ।
पढ़ना है तो तैयारी IAS की करो —
भले नौकरी न मिले,
पर काबिलियत जरूर मिल जाएगी।
यह संसार स्वार्थ और अंधविश्वास से भरा है;
लोग आपको खुश नहीं देखना चाहते।
इसलिए मेरा संदेश है —
कर्म के पीछे भागो, पैसा स्वयं पीछे भागेगा।
नौकर को उतना ही दिया जाता है जितने में उसका गुज़ारा हो सके।
नेताओं के बच्चे नौकरी की ओर नहीं भागते,
क्योंकि वे मालिकों वाली सोच लेकर पैदा होते हैं।
आप भी मालिक बनना चाहते हैं तो
पहले मालिकों जैसी सोच विकसित कीजिए।
जब तक नौकरों वाली मानसिकता में रहेंगे,
जीवन वैसा ही रहेगा।
शेर को जंगल का राजा कोई घोषित नहीं करता —
वह तो अपने सामर्थ्य से ही राजा होता है।
जीवों से सीखो।
जंगल के जानवर कभी निष्क्रिय नहीं रहते —
वे निरंतर सतर्क, सक्रिय और प्रयत्नशील रहते हैं।
वही उनका अस्तित्व है।
हानि से मत डरिए।
जब प्रयत्न करेंगे, तो या तो लाभ होगा या अनुभव मिलेगा।
जो व्यापारी कभी हारा नहीं,
वह वास्तव में कभी जीता भी नहीं।
हानि वह शिक्षक है जो अनुभव के रूप में ज्ञान देती है।
जब खोने के लिए कुछ शेष न बचे,
तब जो ज्ञान मिलता है — वही सफलता की कुंजी बनता है।
प्रयत्न करते रहिए —
क्योंकि कुआँ प्यासे के पास नहीं आता, प्यासे को ही चलकर जाना पड़ता है।
हानि होना ही ब्रह्मांड का नियम है।
उन लोगों से दूरी बनाकर रखिए जो केवल बोलते हैं, करते कुछ नहीं।
आपका परिश्रम ही आपकी सफलता का परिचायक बनेगा।
जब मेहनत इतनी होगी कि उसका फल दूसरों को चुप कर दे,
तब आपकी सफलता स्वयं बोलेगी।
जब कोई आपके क्षेत्र में कदम रखेगा,
तो उसके होंठों पर नाम आपका होगा।
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