प्रेम: जहां दबाव नहीं होता

प्रेम: जहाँ दबाव नहीं होता
लेखक : विनय तिवारी 


प्रेम दो व्यक्तियों के बीच की वह भावना है, जो आत्मा को स्पर्श कर आनंद प्रदान करती है।
जिस व्यक्ति से बात करते हुए मन मुस्कुरा उठे,
जिसका नाम लेते ही चेहरा खिल जाए,
और जिसकी उपस्थिति से भावनाएँ जाग उठें — वही सच्चा प्रेम है।

माँ का पुत्र या पुत्री से प्रेम,
पति का पत्नी से, पत्नी का पति से प्रेम,
पिता का संतान से, शिक्षक का शिष्य से,
या दो सच्चे मित्रों का प्रेम — सभी का सार एक ही है — निर्मल आनंद।

जहाँ दबाव है, वहाँ प्रेम नहीं, समझौता है।
मालिक यदि मजदूर पर दबाव डालता है, तो वह श्रम का संबंध है, प्रेम का नहीं।
पति या पत्नी यदि एक-दूसरे पर दबाव डालें, तो वह धन या आवश्यकता का बंधन है, स्नेह का नहीं।
मित्र यदि मित्र पर दबाव बनाए, तो वह रहस्य का सौदा है, आत्मीयता का नहीं।

प्रेम कभी दबाव में नहीं चलता।
और यदि कोई दबाव में रहकर भी प्रेम के नाम पर जी रहा है,
तो वह प्रेम नहीं — निर्भरता का सौदा है।

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