ऊर्जा और संयम
ऊर्जा और संयम
लेखक - विनय तिवारी
ऊर्जावान व्यक्ति उस प्राकृतिक शक्ति का स्वामी होता है, जो उसे प्रकृति उसकी शारीरिक तपस्या के फलस्वरूप प्रदान करती है।
चमकता हुआ मस्तिष्क, होठों पर हल्की मुस्कान, मधुर वाणी और शरीर में कोयले की तरह धधकता रक्त — साथ ही उतनी ही शीतल मृदुभाषा — यही एक श्रेष्ठ ऊर्जावान व्यक्ति के व्यक्तित्व की पहचान है।
कहा जाता है कि एक समय बाली ने हनुमान को युद्ध की चुनौती दी थी। बाली के पास यह वरदान था कि सामने वाले योद्धा का आधा बल उसके शरीर में समा जाता था।
उस समय हनुमान ध्यानमग्न थे, अतः उन्होंने युद्ध को अगले दिन के लिए टाल दिया।
प्रातःकाल जब वे युद्ध के लिए तैयार हुए, तभी ब्रह्मा जी प्रकट हुए और बोले —
“हे वायुपुत्र! अपनी शक्ति का केवल दसवां भाग ही साथ ले जाना।”
हनुमान ने आज्ञा का पालन किया। जैसे ही बाली उनके सम्मुख आया, हनुमान की ऊर्जा की तीव्रता से उसका शरीर फटने लगा। वह उस शक्ति को धारण करने में असमर्थ था। तब बाली ने हाथ जोड़कर क्षमा मांगी और कहा —
“आपके पास इतना बल होते हुए भी आप इतने शांत और शालीन हैं — यही आपकी वास्तविक शक्ति है।”
बल का प्रयोग केवल उचित समय पर ही किया जाना चाहिए।
ऊर्जा को व्यर्थ समाप्त करना हो तो बंद कमरे में चिल्लाना ही पर्याप्त है;
परंतु वही ऊर्जा यदि लाखों लोगों की भीड़ में संयमित रूप से व्यक्त की जाए, तो वह लाखों हृदयों को स्पंदित कर सकती है।
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