प्रेत आत्मा न होने के 30 तर्क"
"प्रेत आत्मा न होने के 30 तर्क"
✍️लेखक : विनय तिवारी
1). हर दिन लाखो मृत्यु होती है. इस तरह तो भूतों से भर जाता संसार
2). शरीर का इम्यून सिस्टम सूक्ष्म जीव को अन्दर आने नहीं देता फिर, इतना बड़ा शरीर कैसे अन्दर
आ पायेगा
3). पागलौ को भूत क्यों नहीं लगते
4). मरने के बाद ऊर्जा निकलती है तब वह प्रेत आत्मा अपनी भौतिक आकृति में कैसे आ सकती है।
5). कहते हैं आत्मा 84 हजार योनियों से गुजरता है तब फिर मनुष्य योनी में ही व्यक्ति प्रेत क्यों बनते
6). मरते तो गाय, भैंस, बकरी, हाथी और सभी जीव भी है फिर इनके भूत क्यो नहीं लगते है।
7). हर तान्त्रिक आपके भूतकाल को बताता और आपका विश्वास जीत लेता है क्या हैं वह तान्त्रिक आइंस्टीन के ऊर्जा संरक्षण के नियम को सिद्ध करके आपका विश्वास जीत सकता है। वह भी तो भूत काल की घटना है।
8). किसी भूत की भाषा स्पेशल शुद्ध हिन्दी क्यों हो जाती है जबकि उस व्यक्ति को कभी इस प्रकार बोलते देखा ही नहीं गया था।
9). जबकि कण-कण मे भगवान का वास माना जाता है फिर भूत का वास किस स्थान पर रहेगा
10). जब मृत्यू अटल सत्य है फिर डर किस बात का है।
11). जब व्यक्ति डरता है तब कम्बल ओढ़ लेता है फिर रात भर भूत नहीं आता। क्या वह कम्बल से डरता है । या आपकी आंखों मे ही डर भरा है।
12). जो व्यक्ति के शरीर मे घुस सकता है क्या वह कम्बल में नहीं घुस सकता है।
13). ज्ञान अथवा मैमोरी कोशिकाये मस्तिष्क में होती है जो आत्मा तन्त्रिका तंत्र शरीर में छोड़ चुकी है उसमें मैमोरी (स्मृति) कहाँ से आ सकती है।
14). कहते है शरीर पाँच तत्वों से बना है तन्त्रिकाये जल तत्व होती जो मृत्यु के बाद साथ छोड़ देता है फिर बात करने की प्रकृति कहाँ से आती है जबकि स्मृति तो साथ लेकर गया ही नहीं |
(15) अव प्रश्न उठता "फिर ये सब होता क्या है?"
इसके दो प्रमुख कारण है -
(I) मानसिक बीमारी ( शिजोफ्रेनिया ) सिजोफ्रेनिया के लिए विजिट करें
https://youtu.be/YoA84ZweLDw
(Ii) किसी के किरदार में घुस जाना
मस्तिष्क दो भागों में विभक्त होता है
(1) conscious mind (चेतन मन)
(2) subconscious mind (अवचेतन मन)
चेतन मन 10% भाग है जो सोता है, जागता है, निर्णय लेता है, ज़बाब देता है, अपनी पहचान रखता है।
अवचेतन मन 90% भाग है जो स्मृतियां (यादें) को, कल्पनाओं को, जटिल सवालो को, 24 घंटे जागकर हल करता है
जब 10% वाला भाग सोया हुआ रहता है उस वक्त 90% वाला भाग कार्य कर रहा होता है उसी से व्यक्ति को सपने आते हैं अवचेतन मस्तिष्क के पुराने दस्तावेजों को खोलता है नये दस्तावेजों को अरेंज करता है।
अवचेतन मन तुरन्त निर्णय नहीं ले पाता । चेतन मन के सोये हुये अवस्था मे किसी विकार के कारण अवचेतन मन कंट्रोल अपने हाथ में ले लेता है
चूंकि उसे जवाब देने का अभ्यास नहीं होता, खुद की पहचान नहीं होती, बात करने का अभ्यास नहीं होता
इसलिए जो मेमोरी एक्टिव कर दे उसी किरदार में वह खुद को समझ बैठता है और उसी की तरह जवाब देने लगता है उसे लगता है वह वही किरदार बाला व्यक्ति है
और जैसे ही चेतन मन control वापस लेता है व्यक्ति पूर्व अवस्था में वापस आ जाता है
लोग उसकी किरदार वाली अवस्था को भूत समझ बैठते है। इसी का फायदा तन्त्रिक ले जाते है। वास्तव में यह अवस्था चेतन मन में हुयी अमिमितताओं का कारण है।
आशा करता हूँ भूत वाली बात समझ मे आई होगी।
16). प्रत्येक जीव का जन्म एक कोशिका से होता है जिसमे आधी आभा 'माँ' की होती है आधी पिता की उसी मे विभाजन होकर शरीर बनता है।
और व्यक्ति की मृत्यु तक वह आभा बनी रहती हैं
और उसी आधी कोशिका पर समाप्त हो जाती है अर्थात प्रकृति के तत्वों में परिवर्तित हो जाती है।
17).एक चीटी के काटने पर जो शरीर अचानक एविटव हो जाता हो वह दूसरे शरीर को अपने शरीर में कैसे घुसने देगा।
18). प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक बनावट अलग- अलग होती हैं फिर दूसरा व्यक्ति उसमे कैसे एडजेस्ट हो सकता है।
19). भूत होता तो है, लेकिन भूत काल के रूप में है। येसे ही दो काल और है, वर्तमान व भविष्य जो कभी किसी को नहीं लगते ।
20). भूत काल से सीखकर भविष्य का मार्ग प्रशस्त होता है भूत लगता नहीं है।
21). ब्रह्म का अर्थ है अथाह, आनन्द । इसे कह सकते हैं आनन्द का अथाह सागर ही ब्रह्म है स्वयं में खुश रहें और जीवन का आनंद लें
22). जो दुनिया भर की चिंताये छोड़कर अपने कार्य का आनन्द लेने लगता है। फिर किसी विकार की ताकत नहीं जो उस रोम को छू जाय ।
23). हिन्दुओ अर्थात सनातनियों से मेरा विशेष आग्रह है सिर्फ त्रिदेव व उनके रूप की पूजा करे | हर पग पर उत्पन्न देवता मन विचलित कर देते है।
24). हर गाँव , मुहल्ले में बने 10-20 चबूतरे - भूत प्रेत जैसे शब्दों का पालन पोषण करते है इन पर विश्वास खत्म कीजिए। ये सिर्फ फर्जी चबूतरे है कुछ नही ।
25). पूरा मानव शरीर एक सिस्टमों (तंत्रों) का समूह है जिसका कन्ट्रोल रूम मस्तिष्क है। मनुष्य उन्ही तंत्रों को कन्ट्रोल कर सकता है, जो उसने समाज से सीखा है बाकी अथाह क्रियाएं स्वतः ही पूरी होती है
जैसे-
1. सांस लेना 2. हृदय का धड़कना 3. वालो का बढ़ना 4.नाखूनों का बढ़ना 5. भोजन का पाचन 6. पलकौं का झपकना
स्वतः होने वाली क्रियाओं को रोकने की ताकत किसी माई के लाल में नहीं | यदि इन क्रियाओं से खिलवाड़ किया तो मृत्यु निश्चित है।
26).मन में भ्रम उत्पन्न होने से डर पैदा हो जाता है.
27). मृत्यू का डर मस्तिष्क को भ्रमित कर देता है।
28). कोई व्यक्ति दूसरे को धमकाता है तो कहता है उसकी आँखों मे मेरा डर होना चाहिये कभी ये नहीं कहता उसके कानों में मेरा डर होना चाहिए।
क्योंकि डर आँखों से उत्पन्न होता है। मैने जन्मान्ध को भूत प्रेत लगते नहीं देखा।
परन्तु
अब तो विश्वास होगा भूत प्रेत नहीं होते।
29). भगवान के नाम से भूत नहीं भागते बल्कि भगवान को देखकर हमारा चेतन मन एक्टिव हो जाता है। जबकि उसे विश्वास होना चाहिए कि भगवान है तब
30). हमारा सुख दुःख डोपामिन हार्मोन कन्ट्रोल करता है इसलिए हमे ताजे फल व सात्विक भोजन करना चाहिए | जो डोपामिन वड़ा देता है और मन प्रसन्न कर देता।
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